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Friday, March 16, 2012

गुल्लर का फूल















एक पुरानी कहानी है कि एक बुढ़िया थी, वह बहुत गरीब थी, वो अपने बच्चे के पालन-पोशन के लिए दही बेचा करती थी...एक दिन वो रोज की तरह दही बेचने के लिए घर से निकली....जब बेचने के बाद शाम को लौटते समय थोड़ा आराम के लिए...एक गुल्लर के पेड़ के नीचे बैठी तो उसके दही के बरतन में एक गुल्लर का फूल गिरा...ऐसा कहा जाता है कि गुल्लर का फूल होता नहीं है ...और होता भी है तो ...रात को ही खिलता है और रात को ही गायब हो जाता है...उस बुढ़िया के बरतन में फूल गिरना एक चमतकार से कम नहीं था....पर उसे पता नहीं था..फिर वो आराम कर के घर को चल दी...जब वो दुसरे दिन...रोज की तरह दही बेचने घर से निकली...तो, वो दही बेचती जाती थी, पर उसके बरतन में दही जस-का-तस ही रहता था ...जब उसे इस बात का पता चला तो वो खुश हुई...और वो बुढ़िया कुछ ही दिनों में बहुत अमीर बन गई.....



आज 21वीं सदी में इस प्रकार के कहानी पर विश्वास करना हमें आज के जमाने के बच्चों से भी छोटा बनाता है...क्योंकि ...आज के जमाने के बच्चे भी कहानी सुनने से पहले उसमें क्या सच्चाई है उसे पुछते हैं...पर ये कहानी कितना सच है, ये तो हम नहीं जानते, पर गुल्लर का फूल भी होता है ये भी एक प्रश्न ही था। पर आज ये साबित हो चुका है कि गुल्लर का फूल होता है और लोग उसे देख और छु भी सकते हैं।



बिहार के दरभंगा जिले में बेनीपुर नाम का एक छोटा सा गांव है...वहाँ सबीर नामक एक दरगाह है...उस दरगाह में एक गुल्लर का पेड़ है...लोगों का कहना है कि 22.08.2006 में इस गुल्लर के पेड़ में एक गुल्लर का फूल देखने को मिला था..और फिर एक बार इस गुल्लर के पेड़ में फूल देखने को मिला है...एक तो गुल्लर का फूल जिसे लोग एक करिश्मा ही मानते हैं..और ऊपर से दरगाह जैसे पवित्र स्थान पर इसका दिखाई देना...इसे लोग एक प्रकार का करिश्मा ही मान बैठे हैं...



मैं पेशे से एक विडियो एडिटर हुँ..जब ये खबर मेरे पास आई तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ... पर जब देखा तो एक अलग सा ऐहसास हो रहा था..सोचिए आपने अपने बचपन में जो कहानियों को सुना हो और आज हकीकत में वो सच लगने लगे तो आपको कैसा लगेगा...वैसा ही कुछ मुझे लग रहा था...गुल्लर का फूल होना एक करिश्मा से कम नहीं पर वैज्ञानिकों का कहना है कि गुल्लर के फूल होते तो हैं पर वो फूल फल के अंदर ही होते हैं...मगर कभी-कभार पांच- साल में एक बार वो फूल हमें दिखाई दे जाता है....पर हमारे समाज में लोग वैज्ञानिकों की बातों को ज्यादा तवज्जुब नहीं देते और उसे भगवन का करिश्मा ही मान लेते हैं.....
















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